Farrukhabad: जिले के उभरते युवा सामाजिक कार्यकर्ता और ‘रिवैम्प इंडिया फाउंडेशन’ के संस्थापक एवं सीईओ वैभव सिंह राठौर के सामाजिक प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। गुजरात के नर्मदा जिले स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित ‘द्वितीय राष्ट्रीय चेंजमेकर मीट एवं चेंजमेकर अवॉर्ड्स 2026’ में वैभव को व्यक्तिगत चेंजमेकर श्रेणी में सम्मानित किया गया। 1 से 4 अक्टूबर तक चले इस चार दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन में वैभव ने पूरे उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
वडोदरा की समन्वय प्रतिष्ठान द्वारा इंडिया फाउंडेशन और द चेंजमेकर्स नेटवर्क के सहयोग से आयोजित इस मीट में देश के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जमीनी स्तर पर बदलाव ला रहे 51 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उद्घाटन सत्र में गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी उपस्थित रहे। 4 अक्टूबर को आयोजित समापन सह अवॉर्ड संध्या में गुजरात सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा, जायडेक्स समूह के अध्यक्ष डॉ. अजय रांका और समन्वय प्रतिष्ठान के संयोजक डॉ. जिगर इनामदार ने वैभव को यह प्रतिष्ठित सम्मान सौंपा।
जमीनी बदलाव की मिसाल: ‘रिवैम्प इंडिया फाउंडेशन’ के प्रमुख अभियान
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था की ‘फलदार परियोजना’ के तहत 120 से अधिक सरकारी विद्यालयों में 10,000 फलदार पौधे लगाए गए हैं। संस्था पेड़ों की संख्या से ज्यादा उनके जीवन पर ध्यान देती है, जहाँ हर पेड़ की जिम्मेदारी एक छात्र को दी गई है और इसी के परिणामस्वरूप लगभग 75 प्रतिशत पौधे आज भी सुरक्षित हैं।
इसके अलावा ‘उद्धति’ एवं ‘पीरियड डायरी’ पहल के जरिए 5,000 से अधिक किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन से जोड़ा गया है। शिक्षा के क्षेत्र में ‘प्रतिज्ञा’ अभियान और ‘खोज’ कार्यक्रम के जरिए ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूलों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जिसकी एक जमीनी रिपोर्ट कानपुर नगर के जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी सौंपी गई है।
कौशल व आजीविका के लिए ‘समर्थ’ एवं ‘प्रगति’ योजना के तहत वंचित युवाओं को डिजिटल साक्षरता दी जा रही है तथा सरकारी स्कूल के बच्चों की माताओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका के अवसर दिए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण स्वच्छता के तहत ‘भक्षक परियोजना’ के जरिए प्लास्टिक कचरा संग्रहण के लिए गांवों में मछली के आकार की विशाल संरचनाएं स्थापित की गई हैं।
सेवा, शोध और संकल्प का सफर
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से समाज कार्य में पीएचडी कर रहे और एमएसडब्ल्यू डिग्री धारक वैभव “सेवा, शोध, संकल्प” को अपना मूल मंत्र मानते हैं। वे ‘फर्रुखाबाद युवा सेवा समिति’ के सह-संस्थापक हैं और “वैभव्स वर्डिक्ट” नाम से एक पॉडकास्ट भी चलाते हैं। धारा 8 के तहत पंजीकृत उनकी संस्था 170 से अधिक स्वयंसेवकों के साथ काम कर रही है।
सम्मान मिलने पर वैभव सिंह राठौर ने क्या कहा
यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि उन बच्चों, किशोरियों और ग्रामीणों का है जो हमारे हर अभियान की असली ताकत हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर देशभर के चेंजमेकरों के अनुभवों से जो सीख मिली है, उसे अब उत्तर प्रदेश के गांवों के विकास में लगाएंगे।

