श्रृंगीरामपुर (सिंघिरामपुर)
यह पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है जो जिला मुख्यालय से लगभग 15 किमी दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि भगवान राम के जन्म से पूर्व राजा दशराज का पुत्र यज्ञ संपन्न कराने वाले श्रंगी ऋषि का यहाँ जन्म हुआ था। अपनी माता के सामान सिर पर श्रृंग होने के कारण पिता विभाण्डक ने इनका नाम श्रृंग रखा था। तपस्या के पश्चात इसी स्थान पर श्रृंगी ऋषि ने अपने श्रृंग का परित्याग किया था उसी समय से यह स्थान तीर्थ स्थान के रूप में प्रसिद्ध है। इस स्थान पर श्रंगी ऋषि का आश्रम तथा भगवान शिव का मंदिर है। इसके अलावा यह क्षेत्र ग्वालियर के राजा सिंधिया के राज्य का भी हिस्सा रहा है। राज्य की ओर से गंगा पूजन के लिए यहाँ गद्दी स्थापित की गयी थी जो ‘महंत की गद्दी’ के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ कुछ दूरी पर ही ग्वालियर राज्य द्वारा बनवाये गए घाट, शिव मंदिर व हवेलियाँ है। श्रृंगीरामपुर के लगभग पांच किमी की परिधि में ही च्यवन ऋषि और धौम्य ऋषि के आश्रम भी है।
